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हमारी कहानी

हम एप्लिकेशन बनाने के व्यापार में हैं।

हम इन एप्लिकेशनों के जरिए अपने ग्राहकों को मनोरंजन एवं सुविधाएँ प्रदान करने की इच्छा रखने वाले क्लाइंटों के लिए उत्पाद बनाते हैं।यह सदी नवरचना की सदी है और अब टेक्नोलॉजी के जरिए अपने फोन पर मात्र अगूँठा फिराकर फ़्लाइट टिकट बुक कराना संभव हो गया है, इसी तरह टेक्नोलॉजी ने बुजुर्गों के जीवन को भी आसान बनाया है – वे अपनी समय-सारणी में डॉक्टर के अपॉइंटमेंट रख सकते हैं, दवा खाना याद दिलाने के लिए रिमाइंडर लगा कर रख सकते हैं, टिकटें बुक कर सकते हैं, और अपने प्रियजनों से मिल सकते हैं।

पर धीरे-धीरे हमने महसूस किया कि हालांकि हम पूरी दुनिया में आईटी चालित सबसे बड़े देशों में से एक हैं, पर फिर भी हम हमारे अपने लोगों की सुविधा को अनदेखा कर देते हैं।हम हमारे विदेशी क्लाइंट-वर्ग के विचारों और आवश्यकताओं से प्रेरित एप्लिकेशन बनाते आ रहे हैं, और हम ऐसी एप्लिकेशन और सेवाएँ बनाते हैं जिनका उपयोग उनके अपने लक्षित वर्ग द्वारा होना होता है, और यहाँ मुख्य बिंदु यह है कि यह उपयोग, उनकी अपनी भाषा में होता है।

हमें महसूस हुआ कि किसी विदेशी भाषा (जो भारत में अक्सर अंग्रेज़ी ही होती है) में निपुण या सहज न होने मात्र से, बहुत से भारतीय टेक्नोलॉजी और आधुनिक मोबाइल क्रांति के अद्भुत लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।

लोग बैंक का या किसी बुकिंग एप्लिकेशन का किसी ऐसी भाषा, जिसमें वह सहज महसूस नहीं करते, में उपयोग करते समय ग़लती हो जाने के डर से आधुनिक सेवाओं का खुलकर उपयोग नहीं करते हैं।

हमने यह महसूस किया है कि कोई व्यापार या सुविधा प्रदाता कहाँ-कहाँ तक पहुँच सकता है और हमारे बुजुर्ग, हमारे देशवासी क्या-क्या उपयोग कर सकते हैं, इन दो बातों के बीच एक संबंधहीनता है – वह भी बस एक भाषा की दीवार के कारण!

हम केवल भारतीय भाषाओं और भारतीय लोगों पर फ़ोकस करते हैं।

हमें “देवनागरी” क्यों कहा जाता है?

देवनागरी – यह शब्द भारतीयों के दिलों और दिमाग से प्रेरित है। हमारे देश की अधिकांश भाषाओं की लेखन प्रणाली इस प्राचीन लिपि से मानी जाती है जिसे देवनागरी कहते है। देवनागरी के माध्यम से हम दोस्तों, परिवारों और देशवासियों के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते है और उन्हें हर तरह से सक्षम बनाना चाहते हैं।